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Hindi essays on pollution control

Posted on by BETHANN A.

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध Essay or dissertation relating to Enviromentally friendly Smog in Hindi

क्या आप हमारे आस-पास होने वाले प्रदुषण के विषय में जानना चाहते हैं?
क्या आप प्रदुषण के स्रोत,  कारण, इसके प्रभाव और इसको समाधान करने के उपायों के बारे में पढना चाहते हैं?
क्या आप हमारे पृथ्वी को बचाने के लिए पर्यावरण के महत्व essay contest flyer विषय में लोगों को जागरूक करना चाहते हो

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध Essay or dissertation concerning Eco Carbon dioxide in Hindi

पर्यावरण ही जीवन Surrounding is definitely Life

पर्यावरण प्रदूषण (Environmental pollution) का अर्थ होता है पर्यावरण का विनाश। यानि की ऐसे माध्यम जिनके कारण हमारा पर्यावरण दूषित होता है। इसके sponsorship government handle letter से मनुष्य और प्राकृतिक दुनिया को ना भुगतना पड़े उससे पहले हमें इसके विषय में जानना और समझना होगा।

मुख्य प्रकार के पर्यावरण प्रदूषण हैं – वायु प्रदुषण, जल प्रदुषण, ध्वनि प्रदुषण, ऊष्मीय प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण और प्रकाश प्रदूषण। धीरे-धीरे विश्व की जनसंख्या  बढती चली जा रही है जिसके कारण लोग घर बनाने hindi works for smog restrain लिए वनों की कटाई ज़ोरों से कर रहे हैं। इन बीते 10-15 सालों में वनों की कटाई के कारण, पृथ्वी में कई प्रकार के खतरनाक गैसीय उत्सर्जन हुए हैं।

हम एक ऐसे सुन्दर ग्रह पृथ्वी में रहते हैं जो एक मात्र ऐसा ग्रह है जहाँ पर्यावरण और जीवन है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने का एक ही सबसे बेहतरीन तरीके है पानी और वायु को स्वच्छ रखना। पर आज के दिन में मनुष्य इसके विपरीत सभी कार्य करने में लगा है जिसका सबसे बड़ा फल प्रदुषण हमारे आँखों के सामने है।

हमें इस बात को समझना होगा कि अगर हम पृथ्वी को बचाना चाहते हैं तो हमें कड़े कदम उठाने होगे जिससे कि हम अपने पर्यावरण दूषित होने से बचा सकें। बिना जल और वायु के पृथ्वी में जीवन का अंत हो जायेगा इसलिए इन चीजों का संतुलन बनाये रखना बहुत आवश्यक है।

पृथ्वी का जीवमंडल कई प्रकार के चीजों का एक मिश्रण है जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन, और भाप। सभी जीवजंतुओं के लिए यह सभी चीजें बहुत ही जरूरी हैं। हमें पृथ्वी को सुन्दर, स्वच्छ और मानव के लिए एक बेहतर जीवन प्रदान करने के लिए पर्यावरण को नियम अनुसार रखना होगा। लेकिन जिस प्रकार मनुष्य प्रकृति hindi essays with air pollution regulate साथ खिलवाड़ करते चले जा रहा है इसकी आशा बहुत कम दिखाई देती है।

स्रोत और कारण Source and Causes

पर्यावरण प्रदुषण के स्रोत और कारण कुछ इस प्रकार से हैं –

  • आज के मनुष्य को जीवन यापन के लिए कई प्रकार की वस्तुओं की आवश्यकता होती है और प्रतिदिन इसकी मांग भी बढती चली जा रही है। जरूरत के कारण कई जगह के पेड़ पौधे काट कर उन जगहों पर कई घरों और कारखानों का निर्माण किया solar papers lanterns रहा है। उसके बाद उन कारखानों से 3 प्रकार से प्रदुषण हो रहा है। पहला पेड़ काटने के कारण, दूसरा कारखाना से निकलने वाला ज़हरीला पानी सीधा अन्य बड़े जल स्रोतों से मिल रहा है और दूषित कर रहा है, तीसरा कारखानों से निकलने वाला धुआं जो वायु में मिल कर वायु प्रदुषण को बढ़ावा दे रहा है।
  • लोग कूड़ा को सही तरीके से नष्ट नहीं करते जिसके कारण मिटटी की उर्वरता शक्ति भी ख़त्म होते जा रही है।
  • धीरे-धीरे मनुष्य वाहनों पर निर्भर हो चुका है जिसके कारण लाखों-करोड़ों गाड़ियों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदुषण का मुख्य कारण बन चूका है। उसके साथ-साथ इन वाहनों से निकलने वाले तेज़ आवाज़ के कारण ध्वनि प्रदुषण भी फैल रहा है।
  • लोगों की बढती जनसँख्या के कारण और गाँव के शहर में बदलने के कारण हरे भरे बृक्षों को काट दिया जा रहा है जो प्रदुषण का एक बहुत बड़ा कारण है।
  • आज कृषि क्षेत्र में भी ज्यादा फसल के लिए किसान कई प्रकार के खतरनाक फ़र्टिलाइज़र और कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे हैं जो मनुष्य का जीवनकाल कम होने का मुख्य कारण है।

प्रभाव और समस्या Impact and also problem

पर्यावरण प्रदुषण का पृथ्वी और मनुष्य दोनों पर बहुत ही hippocampus analysis papers और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। आज ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने और लाभ के लिए मनुष्य विज्ञानं की मदद ले रहा है। परन्तु इस चक्कर में कई प्रकार के हानिकारक रसायन उत्पादों को हम हर दिन अपने भोजन के माध्यम से खा रहे हैं और हर दिन प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

ना सिर्फ भारत में पुरे विश्व में प्रदुषण का यही हाल है। सबसे बड़ा सवाल बस यही canadian journal with open well-being articles कि क्या हम सही दिशा में चल रहे हैं?

इसका सीधा उत्तर है- बिलकुल नहीं, क्योंकि कोई भी विनाश का रास्ता सही नहीं होता है।

प्रदुषण के कारण कई प्रकार की बीमारियों से पुरे विश्व भर के लोगों को सहना पड़ रहा है। इनमें से कुछ मुख्य बीमारियाँ और स्वास्थ से जुडी मुश्किलें पैदा हो रही हैं – टाइफाइड, डायरिया, उलटी आना, लीवर में इन्फेक्शन होना, साँस से जुडी दिक्कतें आना, योन शक्ति में कमी आना, थाइरोइड की समस्या, आँखों में जलन, कैंसर, ब्लड प्रेशर, और ध्वनि प्रदुषण के कारण गर्भपात।

जो भी सामान आज के दिन में हम खाते हैं, पीते हैं सब कुछ प्रदुषण की चपेट में आ चूका है। हर चीज दूषित हो चूका है जिसके कारण कई लाइलाज बीमारियां फ़ैल चुकी हैं।

जल को प्रदूषित करने के कारण अब पीने का पानी भी पृथ्वी पर बहुत कम बच गया है। आंकड़ों के अनुसार पृथ्वी पर 71 प्रतिशत जल है परन्तु उसमें से मात्र 1 प्रतिशत पानी ही पीने लायक है। लोगों को कपडे धोने, खाना पकाने और खेती किसानी के लिए भी पानी का देखकर उपयोग करना चाहिए।

ज्यादातर कारखाने ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों में निर्माण किये गए हैं जिसके कारण टी बी, अस्थमा, और ह्रदय से जुडी बीमारियों से लोगों को भुगतना पड़ रहा है। भूमि या मिट्टी प्रदुषण के कारण अब भूजल भी भारी मात्रा में दूषित हो चूका है। वैज्ञानिकों का मानना है हम मनुष्य स्वयं के बनाये हुए सामूहिक विनाश के वातावरण में जी hindi works concerning carbon dioxide handle हैं।

पर्यावरण प्रदुषण का समाधान Smog Control

  • जो भी कारखाने बनाये जा चुके हैं उन्हें तो अब हटाया नहीं जा सकता है परन्तु सरकार को आगे बनाये जाने वाले कारखानों को शहर से दूर बनाना चाहिए।
  • ऐसी योजनायें और गाड़ियां बनाना चाहिए जिनसे कम धुआं निकले या वायु प्रदुषण को हम ज्यादा से ज्यादा रोक सकें।
  • जंगलों और पेड़ पौधों की कटाई को किसी भी तरह रोकना चाहिए।
  • नदी के पानी में कचरा फैक कर frightening moment in time essay करने से लोगों को रोकना चाहिए और नदी के पानी को (सीवेज रीसायकल ट्रीटमेंट) की मदद से स्वच्छ करके पीने के कार्य में लगाना चाहिए।
  • प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद कर के रीसायकल होने वाले बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। हाला की भारत में कई बड़े शहरों में  प्लास्टिक के उपयोग को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है।

अंत में बस में पुरे विश्व भर के लोगों को बस इतना कहना चाहूँगा कि आप जितना हो सके हमारे पृथ्वी को स्वच्छ रखें, दूषित ना करें क्योंकि पृथ्वी हमारा घर है। पृथ्वी का विनाश यानि मनुष्य का विनाश है।

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